धान में माइट्स की समस्या 🐞

धान में बालियां बनते समय के दुश्मन -पेनिकल माइट
 ■सरगुजा संभाग- आमतौर पर अभी खरीफ ऋतु में
लगाई गई धान की फसल सितंबर के मध्य तक बालियां जैसे जैसे परिपक्व दूध भरने लगता है तब यह देखा गया है कि धान की बालियां समय से पहले पीली पड़ के दानो में हल्का भूरा पन लिए होता है और ऐसा माइट्स के कारण होता है जहां दानों का रस  चूसता रहता है व दाना खाली हो जाता है जिसे क्षेत्रीय भाषा में खखरा (बदरा )धान कहते हैं l इस प्रकार का समस्या माइट के कारण होता है l
यह समस्या तापमान में बढ़ोतरी होने पर धान की फसल में आसपास के क्षेत्रों में दिखाई पड़ता है आइए जानते हैं इसके प्रमुख लक्षण व उपाय-

 ■ फसल में माइट्स होने पर पहचान कैसे करें-

यह शुरुआत में पत्तियों पर बहुतायत रूप में पाया जाता है इसके बाद बालियों पर भी पहुंच जाता हैैl इस वजह से बालियों में हल्का पीला पूरा धब्बा हो जाता है वह पत्तियों पर सफेद धब्बे दिखाई पड़ते हैं व फसल के  अवशेष के माध्यम से यह किसी अन्य मौसम की फसल में आसानी से प्रभावित करते हैं

     पत्तियां सफेद व बालियों पर भूरा धब्बा होता है 

 इस माइट्स को पहचानना बहुत जरूरी है क्योंकि    इसके लक्षण दूसरे बीमारियों से भी मेल खाते हैं-
जैसे -गंधी बाग यह कीट बहुत तेजी से फैलता है इसके लिए इसका रोकथाम शुरुआती दौर पर ही कर लेना उचित होता है
माइट्स जीवन चक्र
 ■माइट्स के नियंत्रण के उपाय-

□नियमित रूप से घुन के लक्षण के लिए क्षेत्र की निगरानी करें
□संतुलित एनपीके अनुपात के साथ उपजाऊ मिट्टी का उपयोग करें
□संक्रमित क्षेत्र में उपयोग करने से पहले मशीनों की सफाई करें
□फसल के बाद 2 सप्ताह के लिए खेत की परती छोड़ दें
□बीन फलियां पौधों के साथ फसल चक्र अपनाएं जो माइट्स के जीवन चक्र को तोड़ते हैं
□ खेत के चारों तरफ खरपतवार ओं का नियंत्रण आवश्यक है
□रासायनिक नियंत्रण के लिए सिस्टेमिक माइसाइड्स 
का प्रयोग करें l
प्रभावी एसारिसाइड अबामेक्टिन, स्पैरोंमेंसीफैन ,हेकसीथियाजोक्स , एथीऑन ,डाईकोफोल

मनीष प्रजापति 
तकनीकी फैसिलिटेटर 

कृषि विभाग ,बलरामपुर ,छत्तीसगढ़

■  अरविंद कुमार साय 
ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी 
कृषि विभाग ,बलरामपुर, छत्तीसगढ़

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