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Showing posts from October, 2020

किसान का मित्र कवक ट्राइकोडरमा

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       किसान का मित्र कवक ट्राइकोडरमा-  ■किसान का मित्र कवक ट्राइकोडरमा प्राकृतिक रूप से मृदा मेंं पाया जाता है l ट्राइकोडरमा जड़ क्षेत्र में लगातार काम करने वाला एक सूक्ष्म कार्यकर्ता है l हम जानते हैं कि मृदा में 1100 प्रकार के प्रजातियों के जीवाणु कवक और दूसरी प्रजातियों के जैसे -शैवाल ,कीट ,प्रोटोजोआ ,एक्टीनोमाइसीट्स जीवाणु अवशिष्ट पदार्थों को गला कर पोषक तत्व प्रदान करते हैं l मृदा उर्वरा शक्ति बढ़ाते हैं और फसल को हानिकारक कवकों से रक्षा करते हैं l यह कार्बनिक अवशेषों में पाए जातेे हैं l इसकी दो प्रजातियाँ विशेष रूप से प्रचलित हैं-ट्राइकोडर्मा विरिडी एवं ट्राइकोडर्मा हर्जियानम। यह बहुत ही महत्त्वपूर्ण एवं कृषि की दृष्टि से उपयोगी है।  यह हानिकारक कवकों का नाश करता है l ट्राइकोडरमा विभिन्न प्रकार के कवक जनित बीमारियों से रक्षा करता है l ट्राइकोडरमा विभिन्न प्रकार के कवक जनित बीमारियों से रक्षा करता है l परंतु आज हम अंधाधुन कीटनाशक व कवक नाशक जैसे कई रसायनों का प्रयोग कर मृदा में उपस्थित कई सूक्ष्मजीवों को नुकसान पहुंचा रहे हैं जिससे इनकी संख्या में भार...

खेत में फसल अवशेष (पुआल) जलाना खतरनाक

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खेत में फसल अवशेष (पुआल) जलाना कानूनन अपराध है-  ■आज आधुनिक खेती के दौर में किसान एक कृषि वर्ष में बहुफसली एक खेती कर अधिक से अधिक उत्पादन कमाना चाहता है l और इस होड़ में कटाई के उपरांत आगामी फसल की तैयारी के लिए किसान श्रमिकों की अनुपलब्धता व फसल अवशेषों की अधिकता के कारण खेत में ही फसल अवशेषों को जला देता है  l  परंतु हाल ही के वर्षों में मानव श्रम की कमी परंपरागत तरीकों से फसल अवशेषों को हटाने में कमी और फसलों की कटाई के लिए नवीनतम मशीनों का प्रयोग के कारण फसल अवशेषों को जलाने की समस्या बढ़ गई है फसल अवशेषों का बड़ा हिस्सा आगामी फसलों की बुआई के लिए क्षेत्र को साफ करने के लिए खेत में जला दिया जाता है l   जिससे कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है जैसे मृदा की उर्वरा शक्ति क्षीण हो रहा है, फसल अवशेषों को जलाने से पर्यावरण प्रदूषण के साथ-साथ मनुष्यों के स्वास्थ्य के लिए भी खतरनाक साबित हो रहा है दूसरी विपरीत प्रभाव मृदा के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है जिसके कारण मृदा में उपलब्ध नाइट्रोजन ,फास्फोरस ,पोटाश ,सल्फर पोषक तत्वों की उपलब्धता समाप्त होती जा ...

मिर्च में फूल अवस्था का घातक बीमारी -डाई बैक

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मिर्च में डाई बैक समस्या व उपाय- ■सरगुजा संभाग- मिर्च की फसल में  घातक बीमारियों में से एक बीमारी डाई बैक  है l  रोपण वाली फसलों में यह दिसंबर -अक्टूबर में अधिक होता है l  इसका प्रकोप मिर्च की फसल पर अक्सर देखा गया है l मिर्च की फसल में यह कवक बीमारी वृद्धि के समय में फूल अवस्था में देखा जाता है l  फूल सूख कर फूल के डंठल सिकुड़ जाते हैं जिसके फलस्वरूप शाखाओं और तने ऊपर से नीचे की ओर सूखते चला जाता है l  इसका संक्रमण टिप से पीछे की ओर टहनियों  व शाखाओं की ऊपरी भाग को प्रभावित करता है व  पौधा धीमी गति से मरने -मुरझाने लगता है l  इसे ही डाई बैक कहा जाता  है l  ● यह बीज जनित बीमारी है जो बीज से पौधों में फैलता है यह फंगस वातावरण में मौजूद रहते हैं जब भी उचित वातावरण प्राप्त होता है पौधों में प्रवेश कर यह अपना प्रभाव दिखाते हैं l ● किसी भी  कवक  को वृद्धि करने में वातावरणीय कारक का महत्वपूर्ण भूमिका होता है l  वैसे तो वातावरण में जैविक मित्र कवक फफूंद भी उपस्थित होते हैं परंतु यह इनकी अधिकता ना होने...