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Showing posts from September, 2020

धान में गंधी बग किट उपाय एवं रोकथाम

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       धान में गंधी बग किट उपाय एवं रोकथाम  ■सरगुजा संभाग- धान की  गंधी बग किट हमारे फसल में अंतिम सितंबर माह में अधिक दिखाई पड़ता है क्योंकि यह समय धान की बालियों में दूध भरने की समय होता है इस अवस्था में कई प्रकार की बीमारियों व कीटों का प्रकोप धान की बालियों में होता हैl जैसे माइट्स, मा हु और  गंधी बग किट l  आज हम विशेष रूप से बात करेंगे  गंधी बग कीट के बारे में  यह की प्रारंभिक अवस्था में तनो  पर  बैठता है और फिर बालियों में जैसे ही दूध बनना प्रारंभ होता है  बालियों से दूध चूसना प्रारंभ कर देता है जिससे बालियों में दाने नहीं बन पाते और  बालियां को बदरा बदरंग कर देता है  यह कीट अलग तरह का गंध छोड़ता है l इस प्रकार से 30-35 %किसानों के उत्पादन में काफी क्षति पहुंचाता है l ■गंधी बग किट  के जीवन चक्र लक्षण व पहचान- संक्रमित धान के पुआल में दुर्गंध होता है प्रारंभिक अवस्था में यह कीट तनो पर बैठता है व  कीट की उपस्थिति इसके द्वारा उत्सर्जित अलग तरह के गंध से पता लगाया जा सकता है l ...

सावधान घातक है कीटनाशक व कवकनाशक

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सावधान घातक है कीटनाशक व  कवकनाशक -कैसे ,कब स्प्रे कर पाए बेहतर परिणाम  अक्सर किसान अपनी फसलों की सुरक्षा के प्रयास के चलते अपनी सुरक्षा का ध्यान नहीं रखते l  लेकिन  इस दौर में किसानों की सुरक्षा भी आवश्यक है l अभी  खरीफ का मौसम है या यूं कहें कि खेती-बाड़ी का मौसम किसानों के लिए बहुत महत्वपूर्ण समय होता है क्योंकि किसान का सारा पूंजी इस समय खेत पर लगा होता है l किसान की खेती में उत्पादन ही उसका आर्थिक स्तर को निर्धारित करता है ऐसे में जलवायु का फसल के प्रति प्रतिकूल ना होना व खरपतवार कीट बीमारियों का फसल पर प्रकोप हो ही जाता है l  ■ऐसे में आधुनिक जमाने में किसान भाइयों को चाहिए कि जैविक कीटनाशकों का उपयोग के साथ-साथ रसायनिक कीटनाशकों का भी उपयोग समय समय पर करना चाहिए जिससे कि मिट्टी की उर्वरा शक्ति को बनाए रखते हुए इन व्याधियों से निदान पाया जाए तो आइए जानते हैं कीटनाशक व कवक नाशक रसायनों का प्रयोग करते समय किन किन बातों का ध्यान रखना आवश्यक है l ■  कीटनाशकों के डिब्बों पर तिकोने आकार का निशान बना होता है जो उसकी विषाक्...

धान में माइट्स की समस्या 🐞

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धान में बालियां बनते समय के दुश्मन -पेनिकल माइट  ■सरगुजा संभाग- आमतौर पर अभी खरीफ ऋतु में लगाई गई धान की फसल सितंबर के मध्य तक बालियां जैसे जैसे परिपक्व दूध भरने  लगता है तब यह देखा गया है कि धान की बालियां समय से पहले पीली पड़ के दानो में हल्का भूरा पन लिए होता है  और ऐसा माइट्स के कारण होता है जहां  दानों का रस  चूसता रहता है व दाना खाली हो जाता है जिसे क्षेत्रीय भाषा में खखरा (बदरा )धान कहते हैं l  इस प्रकार का समस्या माइट के कारण होता है l यह समस्या  तापमान में बढ़ोतरी होने पर धान की फसल में आसपास के क्षेत्रों में दिखाई पड़ता है आइए जानते हैं इसके प्रमुख लक्षण व उपाय-  ■  फसल में  माइट्स होने पर पहचान कैसे करें- यह शुरुआत में पत्तियों पर बहुतायत रूप में पाया जाता है इसके बाद बालियों पर भी पहुंच जाता हैैl  इस वजह से बालियों में हल्का पीला पूरा धब्बा हो जाता है वह पत्तियों पर सफेद धब्बे दिखाई पड़ते हैं  व फसल के  अवशेष के माध्यम से यह किसी अन्य मौसम की फसल में आसानी से प्रभावित करते हैं ...

छत्तीसगढ़ के उत्तरी पहाड़ी क्षेत्रों में आलू की उन्नत खेती

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  छत्तीसगढ़ के उत्तरी पहाड़ी  क्षेत्रों में आलू की उन्नत खेती   आलू भारत की सबसे महत्वपूर्ण फसलों में से एक है जिस  की खेती देश देश में 1-2 राज्यों को छोड़कर सभी राज्यों में  खेती की जाती है अन्य फसलों की तरह आलू की अच्छी पैदावार के लिए उन्नत किस्मो व रोग रहित किस्मों की उपलब्धता आवश्यक है इसके अलावा उर्वरकों का उपयोग सिंचाई की व्यवस्था व रोग नियंत्रण के उपाय व रोकथाम दवाइयों का प्रयोग भी उपज पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालता है  छत्तीसगढ़ में आलू की खेती प्रायः प्रायः सभी जिलोंं में की जाती है राज्य में कृषि क्षेत्र को बढ़ावा देनेे हेतु कृषि विश्वविद्यालय जो कि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर में स्थित है उक्त विश्वविद्यालय कृषि क्षेत्र में अनेकों अनुसंधान कर कई उन्नत किस्मों को उत्पन्न करने में प्रयासरत है वही  छत्तीसगढ़ में जलवायु क्षेत्र को तीन भागों में बांटा गया है छत्तीसगढ़ का मैदान ,उत्तरी पहाड़ी क्षेत्र, बस्तर का पठार  जहां उतरी पहाड़ी क्षेत्र में 5 जिले सम्मिलित है बलरामपुर ,जशपुर, कोरिया, सूरजपुर ,अंबिकापुर (सरगु...

धान की फसल में सफेद बालियां और लाल व काले दाने?

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धान की फसल में सफेद बालियां और लाल व काले दाने?  किसान भाइयों आपने देखा होगा जब आप की फसल की बालियां निकलने लगती हैं तो एक बड़ा परिवर्तन होता है मौसम का मौसम परिवर्तन होते ही धान  की फसलों में अनेक बीमारियों को (बालिया निकलते समय) देखा गया है जैसे गर्दन तोड़ जो मौसम में नमी के कारण होता है वह बालियां निकलते समय बीमारी के कारण पौधे में गांठ कमजोर हो जाती है और यही वजह है कि धान की बालियां सफेद हो जाती है इसलिए बालियां सफेद होने से दाना विकसित नहीं हो पाता है जिससे फसल पूर्ण रूप से प्रभावित हो जाता है कई कृषि अधिकारी व किसानों से चर्चा उपरांत यह पाया गया है कि ऐसा होने का प्रमुख कारण यूरिया खाद की अधिक मात्रा में प्रयोग करने से भी होता है  वैसे भी रात के समय तापमान में गिरावट आ जाती है जिससे काफी नमी हो जाता है पौधे के पत्तियों में ओस ज्यादा पढ़ने से यह रोग ज्यादा फैलने लगता है जिससे बालियां सफेद होने के लगता है सफेद बालियां होने से बचाव- मित्रों आपके फसल में यह रोग 15% लग गया है और बालियां निकल रही हैं तो इससे निदान पाया जा सकता है ■ सर्वप्रथम यह क...

धान में फूल बालियां आते समय किसान भाई यह गलतियां ना करें

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धान में फूल बालियां आते समय किसान भाई यह गलतियां ना करें किसान भाई इस समय ध्यान दें यह समय है फूल और बालियों का बनने का इस समय अनेकों प्रकार की कीट व्याधियों का का प्रकोप हमारे फसलों पर होता है अतः हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हमारा फसल फूल और बालियां का समय हो चुका है तो हमें चाहिए कि किसी भी प्रकार का कीटनाशक या कवकनाशी का प्रयोग हमें बहुत ही सोच समझ कर करना चाहिए क्योंकि यह अवस्था ही सुनिश्चित करता है धान का पैदावार को अतः किसान भाई ध्यान देवें की सुबह के समय किसी भी तरह का स्प्रे धान की फसलों पर नहीं करें कारण क्योंकि सुबह धान की फसल में मेल और फीमेल भाग आपस में मिलते हैं तो दाना बनता है इस क्रिया को fertilization कहा जाता है (Fertilization Activity) फूल बनाने की प्रक्रिया धान में 5 से 7 दिनों तक चलता है अतः किसान भाई ध्यान दें धान में पूरी तरीके से बालियां विकसित होने के उपरांत ही किसी भी प्रकार का स्प्रे करें * स्प्रे करने से क्या नुकसान है * - Fertilization  व फूल बनते समय दाना का मुंह खुला रहता है जिससे स्प्रे के वजह से प्रेशर दानों पर पड़ता है वह दाना काला...