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धान फसल के खतरनाक कीट ,बीमारियों का रामबाण इलाज

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धान फसल के खतरनाक कीट ,बीमारियों का रामबाण इलाज 👉 धान की फसल में लगने वाले कीट एवं रोग नियंत्रण सरगुजा संभाग - कृषि प्रधान देश भारत के राज्य छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है। हमारे राज्य में लगभग सभी जगह धान की पैदावार की जाती है, जिसमें अलग-अलग जलवायु, मिट्टी, पानी के अनुसार कई प्रकार के धान की पैदावार की जाती है। अधिक उत्पादन के लिए एकीकृत कीट प्रबंधन एक व्यापक पारिस्थितिक दृष्टिकोण है, जिसमें सभी उपलब्ध तकनीकों जैसे कि कल्चरल, आनुवांशिक, यांत्रिक, जैविक एवं रासयनिक कीटनाशकों को एक सामंजस्यपूर्ण और संगतपूर्ण रूप में उपयोग किया जाता है, जिससे फसल में लगने वाले कीटों की संख्या को आर्थिक चोट स्तर से नीचे रखा जा सके | एकीकृत कीट प्रबंधन का उद्देश्य पर्यावरण की सुरक्षा के अलावा मानव और पशु स्वस्थ पर ध्यान देने के साथ फसल के नुकसान को कम किया जा सके | धान की फसल में एकीकृत कीट प्रबंधन की प्रमुख तकनीकें :- कल्चरल/संस्कृति तकनीक :- यह आई.पी.एम की एक प्रमुख तकनीक है इसमें ग्रीष्मकालीन जुताई, स्वस्थ बीजों का चयन, समय पर रोपण, स्वस्थ नर्सरी की स्थापना, खेत से खरपतव...

लाखडाउन - गर्मियों में छत पर उगाए पौष्टिक व ऑर्गेनिक सब्जियां🫑🥒🥬🥦🍓🍅🥔🧅🧄

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लाखडाउन - गर्मियों में छत पर उगाए पौष्टिक व ऑर्गेनिक सब्जियां🫑🥒🥬🥦🍓🍅🥔🧅🧄 आज बढ़ती शहरीकरण व जनसंख्या दर जिस तरह शहर के दायरे बढ़ रहे हैं उसी तरह जनसंख्या में वृद्धि हो रही है जिसके फलस्वरूप खाद्यान्नों की अत्यधिक खपत परिणामस्वरूप भूमि का उत्पादन के लिए अत्यधिक दोहन जमीन में अंधाधुन उत्पादन की भूख भी बढ़ चुकी है जिससे कई प्रकार के रसायनों कीटनाशकों से मिट्टी बंजर व उर्वरा शक्ति क्षीण होती जा रही है जिसका प्रभाव हमारे फसलों पर अनेक प्रकार के कीट व्याधियों की समस्या उत्पन्न हो रही है इन रसायनों से ना केवल फसलों ,मिट्टियों व मनुष्यों अपितु सबसे ज्यादा नुकसान हमारे प्रकृति को हुआ है l वर्तमान स्थिति में पौष्टिक व शुद्ध सब्जियां प्राप्त कर पाना संभव नहीं है इसलिए वर्तमान में स्थिति को देखते हुए कई ऐसी खेती का प्रचलन हो चला है जैसे फ्लोटिंग गार्डनिंग ,ग्रीनहाउस फार्मिंग, हाइड्रोपोनिक्स , एयरोपोनिक्स ,किचन गार्डनिंग व टेरेस फार्मिंग जिसमें भूमि पर खेती ना करके या मृदा मिट्टी का समुचित मात्रा में प्रयोग करके ऐसे तकनीकों का प्रयोग भी प्रचलन में आया है l इसी तर्ज...

PART-2 कद्दूवर्गीय सब्जियों में मुख्य कीटो व बीमारियों के नियंत्रण के उपाय एवं रोकथाम👉ग्रीष्मकालीन सब्जियों जैसे कद्दू करेला ,लौकी ,टिंडा ,परवल, तोरई ,पेठा खीरा एवं ककड़ी जैसे सब्जियों के महत्वपूर्ण किट व रोग प्रबंधन

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PART-2 कद्दूवर्गीय सब्जियों में  मुख्य कीटो व बीमारियों के नियंत्रण के उपाय एवं रोकथाम👉 ग्रीष्मकालीन सब्जियों जैसे कद्दू करेला ,लौकी ,टिंडा ,परवल, तोरई ,पेठा खीरा एवं ककड़ी जैसे सब्जियों के महत्वपूर्ण किट व रोग प्रबंधन👉 1- लाल पंपकिन बीटल - ■कद्दूदू वर्गीय सब्जियोंं में एक कीट जो मुख्य रूप से सब्जियोंं सब्जियों में एक कीट जो मुख्य रूप से कद्दू वर्गीय फसल पर आक्रमण करता है वह कीट है लाल पंपकिन बिटल यह लाल रंग का किस पौधे के पत्तियों को शुरुआती अवस्था में पत्तियों को खाकर नष्ट कर देता है जिससे फसल की बढ़वार बिल्कुल रुक जाती है l ■कद्दू वर्गीय सब्जियों में मुख्यतः कद्दू ,करेला ,लौकी ,ककड़ी, तोरई, पेठा ,परवल  एवं खीरा इत्यादि किस वर्ग में आते हैं l ■ लक्षण व जीवनकाल - मादा पीले रंग के होते हैं व 5 से 15 दिनों के बाद यह हेच हैचिंग अंडा देते हैं  क्रीमी सफेद रंग का युवा जिसे लारवा कहते हैं 14 से 25 दिनों के पश्चात युवा अवस्था में यह पहुंच जाता है और 7 से 20 दिनों तक इसी अवस्था में होता है जब तक कि वयस्क अवस्था में ना पहुंच जाए l ■ मादाएं 1...

कद्दूवर्गीय सब्जियों में लाल पंपकिन बीटल कीट नियंत्रण के उपाय एवं रोकथाम

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कद्दूवर्गीय सब्जियों में लाल पंपकिन बीटल कीट नियंत्रण के उपाय एवं रोकथाम👉 ■कद्दूदू वर्गीय सब्जियोंं में एक कीट जो मुख्य रूप से सब्जियोंं सब्जियों में एक कीट जो मुख्य रूप से कद्दू वर्गीय फसल पर आक्रमण करता है वह कीट है लाल पंपकिन बिटल यह लाल रंग का किस पौधे के पत्तियों को शुरुआती अवस्था में पत्तियों को खाकर नष्ट कर देता है जिससे फसल की बढ़वार बिल्कुल रुक जाती है ■कद्दू वर्गीय सब्जियों में मुख्यतः कद्दू ,करेला ,लौकी ,ककड़ी, तोरई, पेठा ,परवल  एवं खीरा इत्यादि इसी वर्ग में आते हैं l ■लक्षण व जीवनकाल -मादा पीले रंग के होते हैं व 5 से 15 दिनों के बाद यह हेच हैचिंग अंडा देते हैं  क्रीमी सफेद रंग का युवा जिसे लारवा कहते हैं 14 से 25 दिनों के पश्चात युवा अवस्था में यह पहुंच जाता है और 7 से 20 दिनों तक इसी अवस्था में होता है जब तक कि वयस्क अवस्था में ना पहुंच जाए l ■ मादाएं 150 से 300 अंडे देती हैं वह 10 महीने तक जीवित रहते हैं और उसके  वयस्क कीट पत्तियों को खाकर नष्ट कर करते हैं l ■ रोकथाम- जैविक नियंत्रण> ■4 लीटर पानी में आध...

सब्जियों में होने वाली खतरनाक बीमारी

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सब्जियों में होने वाला खतरनाक बीमारी -पीला मोजेक आमतौर पर मोजैक वायरस सब्जियों में देखा गया है जैसे करेला, कद्दू , लोकी, खीरा व टमाटर मोजैक वायरस के कारण पत्तियों पर पीले सफेद वह भूरे रंग के धब्बे बन जाते हैं और पत्तियां सिकुड़ने लगती हैं जिसके कारण पौधे की बढ़वार रुक जाती है और फल भी विकृत प्रकार के होते हैं   इस वायरस के कारण पत्तों के शिरा विन्यास पत्तों केे नशा भी पीले पढ़ने लगते हैं I ■इस वायरस को पहचान पाना बहुत ही मुश्किल होता है क्योंकि क्लोरोसिस डिफिशिएंसी आयरन की कमी के कारण भी इस प्रकार का लक्षण सब्जियों के पत्तियों पर भी दिखाई देते हैं I ■क्लोरोसिस डिफिशिएंसी और पीला मोजेक वायरस दोनों के लक्षण एक समान दिखाई पड़ते हैं किंतु  मोजैक वायरस सफेद मक्खी कीट के कारण फैलता है l इस रोग का संचारण सफेद मक्खी द्वारा होता है। इस कारण इस बीमारी में फफूंद नाशक दवाई भी कारगर साबित नहीं हो पाते l   ■रोग फैलने का प्रमुख कारण-> फसलों में विषाणु रोगों के प्रकोप से काफी नुकसान होता है। विषाणु रोगों का महत्व इसलिये भी अधिक है क्यों...

किसान का मित्र कवक ट्राइकोडरमा

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       किसान का मित्र कवक ट्राइकोडरमा-  ■किसान का मित्र कवक ट्राइकोडरमा प्राकृतिक रूप से मृदा मेंं पाया जाता है l ट्राइकोडरमा जड़ क्षेत्र में लगातार काम करने वाला एक सूक्ष्म कार्यकर्ता है l हम जानते हैं कि मृदा में 1100 प्रकार के प्रजातियों के जीवाणु कवक और दूसरी प्रजातियों के जैसे -शैवाल ,कीट ,प्रोटोजोआ ,एक्टीनोमाइसीट्स जीवाणु अवशिष्ट पदार्थों को गला कर पोषक तत्व प्रदान करते हैं l मृदा उर्वरा शक्ति बढ़ाते हैं और फसल को हानिकारक कवकों से रक्षा करते हैं l यह कार्बनिक अवशेषों में पाए जातेे हैं l इसकी दो प्रजातियाँ विशेष रूप से प्रचलित हैं-ट्राइकोडर्मा विरिडी एवं ट्राइकोडर्मा हर्जियानम। यह बहुत ही महत्त्वपूर्ण एवं कृषि की दृष्टि से उपयोगी है।  यह हानिकारक कवकों का नाश करता है l ट्राइकोडरमा विभिन्न प्रकार के कवक जनित बीमारियों से रक्षा करता है l ट्राइकोडरमा विभिन्न प्रकार के कवक जनित बीमारियों से रक्षा करता है l परंतु आज हम अंधाधुन कीटनाशक व कवक नाशक जैसे कई रसायनों का प्रयोग कर मृदा में उपस्थित कई सूक्ष्मजीवों को नुकसान पहुंचा रहे हैं जिससे इनकी संख्या में भार...