मिर्च में फूल अवस्था का घातक बीमारी -डाई बैक

मिर्च में डाई बैक समस्या व उपाय-
■सरगुजा संभाग-मिर्च की फसल में घातक बीमारियों में से एक बीमारी डाई बैक है l रोपण वाली फसलों में यह दिसंबर -अक्टूबर में अधिक होता है l इसका प्रकोप मिर्च की फसल पर अक्सर देखा गया है l

मिर्च की फसल में यह कवक बीमारी वृद्धि के समय में फूल अवस्था में देखा जाता है l फूल सूख कर फूल के डंठल सिकुड़ जाते हैं जिसके फलस्वरूप शाखाओं और तने ऊपर से नीचे की ओर सूखते चला जाता है l इसका संक्रमण टिप से पीछे की ओर टहनियों व शाखाओं की ऊपरी भाग को प्रभावित करता है व पौधा धीमी गति से मरने -मुरझाने लगता है l इसे ही डाई बैक कहा जाता 
है l 
यह बीज जनित बीमारी है जो बीज से पौधों में फैलता है यह फंगस वातावरण में मौजूद रहते हैं जब भी उचित वातावरण प्राप्त होता है पौधों में प्रवेश कर यह अपना प्रभाव दिखाते हैं l

किसी भी कवक को वृद्धि करने में वातावरणीय कारक का महत्वपूर्ण भूमिका होता है l वैसे तो वातावरण में जैविक मित्र कवक फफूंद भी उपस्थित होते हैं परंतु यह इनकी अधिकता ना होने के कारण यह हानिकारक कवक से सामना नहीं कर पाते जैसे-ट्राइकोडरमा वीरीडी इत्यादि l

■रोकथाम व उपाय-
□ सर्वप्रथम ऐसे स्वस्थ बीज का चुनाव करें व बीज का उपचार करें l
बीज उपचार के लिए ट्राइकोडरमा वीरीडी जैविक मित्र कवक फफूंद 10 ग्राम / किलो बीज के साथ उपचारित करें l
■ट्राइकोडरमा वीरीडी -यह एक मित्र जैविक फफूंद है जो कि वातावरण में पाया जाता है परंतु इससे कृत्रिम रूप से भी बीज को उपचारित किया जा सकता है जो बीज में चिपक कर बीज में विकसित होता है वह हानिकारक कवक से रक्षा करता है l

थीराम या कैप्टन 4G / किलोग्राम रासायनिक उपचार भी कर सकते हैं l

नोट:-  बीज उपचार जैविक फफूंद से या रसायनों में से एक का प्रयोग ही करें l क्योंकि जैविक का प्रयोग करने उपरांत रसायन का प्रयोग करने से जैविक फफूंद की क्रियाशीलता समाप्त हो जाती है l

□ मिर्च की फसल में अनावश्यक सिंचाई करने से बचें क्योंकि अत्यधिक सिंचाई व्याधियों का वाहक होता हैl

थीराम 0. 25% कैप्टन 0.2% या जेनब और कॉपर ऑक्सिक्लोराइड का संयोजन के साथ तीन बार छिड़काव करें-
 पहला छिड़काव -फूल आने से पहले ,दूसरा छिड़काव -फल बनने के समय, तीसरा छिड़काव 15 दिन के अंतराल में किया जाना फसल के लिए लाभप्रद होता है 

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■मनीष प्रजापति 
तकनीकी फैसिलिटेटर 

कृषि विभाग ,बलरामपुर ,छत्तीसगढ़
■  अरविंद कुमार साय 
ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी 
कृषि विभाग ,बलरामपुर, छत्तीसगढ़


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