खेत में फसल अवशेष (पुआल) जलाना खतरनाक

खेत में फसल अवशेष (पुआल) जलाना कानूनन अपराध है-

 ■आज आधुनिक खेती के दौर में किसान एक कृषि वर्ष में बहुफसली एक खेती कर अधिक से अधिक उत्पादन कमाना चाहता है l और इस होड़ में कटाई के उपरांत आगामी फसल की तैयारी के लिए किसान श्रमिकों की अनुपलब्धता व फसल अवशेषों की अधिकता के कारण खेत में ही फसल अवशेषों को जला देता है l  परंतु हाल ही के वर्षों में मानव श्रम की कमी परंपरागत तरीकों से फसल अवशेषों को हटाने में कमी और फसलों की कटाई के लिए नवीनतम मशीनों का प्रयोग के कारण फसल अवशेषों को जलाने की समस्या बढ़ गई है फसल अवशेषों का बड़ा हिस्सा आगामी फसलों की बुआई के लिए क्षेत्र को साफ करने के लिए खेत में जला दिया जाता है l  जिससे कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है जैसे मृदा की उर्वरा शक्ति क्षीण हो रहा है, फसल अवशेषों को जलाने से पर्यावरण प्रदूषण के साथ-साथ मनुष्यों के स्वास्थ्य के लिए भी खतरनाक साबित हो रहा है दूसरी विपरीत प्रभाव मृदा के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है जिसके कारण मृदा में उपलब्ध नाइट्रोजन ,फास्फोरस ,पोटाश ,सल्फर पोषक तत्वों की उपलब्धता समाप्त होती जा रही है जिसका कमी को पूरा करने के लिए सीधा प्रभाव किसान के लागत में वृद्धि हो जाता है l
 
■ मृदा में उपस्थित जैविक मित्र जीवाणुओं की संख्या में कमी आ रही है मित्र कीटों की संख्या में कमी हो रही है l (मित्र कीट परागण में फसलों में सहायक होते हैं मित्र कीट चीटियां ,मधुमक्खी ,काकसीनेला इत्यादि)
जिसका सीधा प्रभाव फसलों पर पड़ता है l कई ऐसी जैविक मित्र फफूंद कवक जैसे -ट्राइकोडरमा प्रजाति इत्यादि जो कई प्रकार की बीमारियों से रक्षा करते हैं फसल अवशेषों को जलाने से कई फसल वह मृदा मित्र घटकों का नुकसान होता है जो भविष्य के लिए अत्यंत हानिकारक हैl 
■फसल अवशेषों का विभिन रूप में उपयोग:- फसल अवशेषों का उपयोग पशु चारा, कंपोस्टिंग, बिजली उत्पादन, जैव ईंधन उत्पादन और मशरूम की खेती के लिए किया जा सकता है. इसके अलावा कई अन्य कार्यों जैसे छप्पर,चटाई और खिलौना बनाने में भी इसका प्रयोग सदियों से हो रहा है l

■फसल अवशेषों को जलाने के मुख्य कारण:-       

 □श्रमिको की अनुपलब्धता l □फसल अवशेषों को संभालने के लिए कटाई के दौरान उच्च मजदूरी l       □आगामी फसल की बुवाई के लिए समय की कमी.    □विशेष रूप से कटाई के उपयोग में मशीनीकरण का उपयोग बढ़ाना l □पशुधन की संख्या घटना l            □खेत में फसल अवशेष कंपोस्टिंग का लंबी अवधि लेना l □फसल अवशेष (भूसे) के लिए एक बड़ी परिवहन लागत l □भूसे के लिए भंडारण सुविधा की कमी l   □ चावल फसलों के भूसे का कम पौष्टिक मूल्य □फसल अवशेष के लिए बाजार की कमी l

 ■जन जागरूकता अभियान:-
आज के आधुनिक खेती में सरकार को चाहिए कि फसल अवशेष को जलाने के परिपेक्ष में पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाना चाहिए इस संबंध में विशेष रुप से धारा लागू कर यदि कोई किसान फसल अवशेष को जलाता पाया जाए तो वह पर्यावरण के नुकसान की भरपाई के लिए स्वयं जिम्मेदार व उत्तरदाई होगा वह मैदानी अम्लों के कर्मचारियों के माध्यम से अवशेष जलाने के दुष्प्रभाव के बारे में जागरूक कर व्यापक प्रचार-प्रसार करवाया जाए जिससे पुआल जलाने से स्वास्थ्य के साथ-साथ पर्यावरण व मित्र जीव-जंतुओं पर किस प्रकार से प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है यह जागरूकता अभियान का मुख्य उद्देश्य होना चाहिए l 


-------------------00000----------------------

Comments

Popular posts from this blog

PART-2 कद्दूवर्गीय सब्जियों में मुख्य कीटो व बीमारियों के नियंत्रण के उपाय एवं रोकथाम👉ग्रीष्मकालीन सब्जियों जैसे कद्दू करेला ,लौकी ,टिंडा ,परवल, तोरई ,पेठा खीरा एवं ककड़ी जैसे सब्जियों के महत्वपूर्ण किट व रोग प्रबंधन

किसान का मित्र कवक ट्राइकोडरमा

सब्जियों में होने वाली खतरनाक बीमारी